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Mami Bhanja Sex Story – Blackmail & Forced Sex of Innocent Aunt, 3

by 3 min read639 words29 September 2026
Mami Bhanja Sex Story – Blackmail & Forced Sex of Innocent Aunt, 3

जारी…

अगली सुबह रोहन ने प्रिया को बाथरूम में घसीट लिया। दरवाज़ा बंद किया और उसे घुटनों पर बैठा दिया।

“मुँह खोल। आज गहरा लेना पड़ेगा।”

प्रिया काँप रही थी। रोहन ने अपनी मोटी लंड उसके होठों पर रखी और बिना रुके गले तक धकेल दी। प्रिया की आँखों से आँसू निकल आए, वो घुटने में खांसने लगी, लेकिन रोहन ने उसके बाल दोनों हाथों से पकड़कर और गहराई तक ठेल दिया।

“साँस रोक… और ले… पूरा।” उसने धमकी भरी आवाज़ में कहा। “अगर दाँत लगाए या पीछे हटी तो आज रात गांड में तीन बार लूँगा। समझी?”

प्रिया ने सिर हिलाया। रोहन ने उसके गले को अपने लंड से कुचलना शुरू कर दिया। हर धक्के में उसकी नाक रोहन के पेट से टकरा रही थी। लार और आँसू दोनों बह रहे थे, भारी स्तन हिल रहे थे। जब प्रिया का चेहरा लाल हो गया और साँस फूलने लगी, तभी रोहन ने बाहर निकाला और उसके मुँह में ही झड़ गया। वीर्य उसके गले में चला गया, कुछ बाहर भी निकला।

“निगल। एक बूँद भी बाहर मत गिरने देना।”

प्रिया ने रोते हुए निगल लिया।

उसके बाद रोहन ने नए सख्त नियम बना दिए।

वो प्रिया के सामने खड़ा हो गया और बोला —

“आज से नया नियम। तू खुद मुँह से बोल —

‘मैं अब बिना पैंटी के नहीं रहूँगी… मतलब पैंटी कभी नहीं पहनूँगी। जो कपड़े पहनने हैं वो सिर्फ मेरे भांजे तय करेंगे।’”

प्रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया। आवाज़ काँपती हुई निकली —

“मैं… अब बिना पैंटी के नहीं रहूँगी… जो कपड़े पहनने हैं… वो सिर्फ मेरे भांजे तय करेंगे…”

रोहन मुस्कुराया। “अच्छी बात। अब से घर में सिर्फ पतली नाइटी या साड़ी बिना ब्लाउज के। बाहर जाना हो तो जो मैं कहूँगा वही पहनेगी। पैंटी बिल्कुल मना। ब्रा भी तभी जब मैं इजाज़त दूँ।”

उसने और नियम जोड़ दिए:

  1. सुबह उठते ही नंगी होकर उसके कमरे में आना और मुँह से सेवा करना।
  2. दिन में घर में घूमते समय हमेशा उपलब्ध रहना — जब वो बुलाए, तुरंत नंगी हो जाना।
  3. रात को सोते समय हाथ-पैर बाँधकर रखना ताकि वो कभी भी इस्तेमाल कर सके।
  4. अगर कोई गलती हुई तो सज़ा — पहले गांड पर रूलर, फिर दोनों छेदों में बारी-बारी।

उस दिन से प्रिया बिना पैंटी के रहने लगी। साड़ी पहनती तो नीचे कुछ नहीं। नाइटी पहनती तो भी नंगी। रोहन कभी-कभी अचानक उसका पल्लू हटा देता और जाँघों के बीच उंगली घुमा देता। गीली पाकर मुस्कुराता।

शाम को और सख्त सज़ा मिली।

रोहन ने उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटाया। दोनों हाथ पीछे बाँधे। फिर लकड़ी का रूलर निकाला।

“बीस थप्पड़। गिनती खुद बोलना।”

पहला थप्पड़ पड़ा — जोरदार। प्रिया चीखी। “एक…”
दूसरा… तीसरा… हर थप्पड़ पर उसकी नरम गांड लाल होती गई। दस तक आते-आते आँसू बहने लगे। बीस पूरे होने के बाद उसकी गांड जल रही थी।

फिर रोहन ने बिना किसी देरी के अपनी लंड उसकी चूत में धकेल दी। जलन और दर्द से प्रिया की आवाज़ निकल गई। रोहन ने कमर पकड़कर बेरहमी से धकेलना शुरू किया। हर धक्के में उसकी लाल गांड और भी जल रही थी।

“अब से और सख्त,” रोहन ने कहा। “तू मेरी संपत्ति है। कपड़े, बदन, छेद — सब मेरे।”

वो और तेज़ हो गया। एक हाथ से बाल खींच रहा था, दूसरे से उसके मोटे निप्पल को मरोड़ रहा था। प्रिया के शरीर में दर्द और जबरदस्ती की गर्मी फैल रही थी। उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को निगल रही थी।

अंत में रोहन ने गहराई तक झड़ दिया। वीर्य अंदर भर गया। उसने लंड निकाली तो सफेद तरल उसकी जाँघों पर बहने लगा।

प्रिया थककर बिस्तर पर पड़ी थी — गांड लाल, चूत सूजी हुई, आँसू सूखे हुए।

रोहन ने उसके बाल सहलाए और धीरे से कहा —

“कल से और नए नियम आएँगे। तैयार रह। अब तू पूरी तरह मेरी गुलाम है।”

प्रिया ने सिर्फ फुसफुसाया —

“…हाँ… भांजे…”

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