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Mami Bhanja Sex Story – Blackmail & Forced Sex of Innocent Aunt

by 10 min read2,082 words29 September 2026
Mami Bhanja Sex Story – Blackmail & Forced Sex of Innocent Aunt

भानजा का ब्लैकमेल – मासूम मामी की मजबूरी

पात्र:

  • मामी: प्रिया शर्मा, ३६ साल की, धीरे बोलने वाली, गोरी, फुल बॉडी – भारी-भारी चूचियाँ, नरम पेट, मोटी जाँघें। मामा से शादीशुदा (जो हमेशा काम के चक्कर में बाहर रहता है)। बिलकुल मासूम, कभी गंदी बात सोची भी नहीं। इंदौर की एक शांत कॉलोनी में रहती है।
  • भानजा: रोहन, २१ साल का, लंबा, तेज निगाहों वाला। उसी शहर में पढ़ता है। हॉस्टल मरम्मत में होने की वजह से कुछ महीने मामी के पास रहने आया। चालाक, चुपचाप, हफ्तों से उसे घूर रहा है।

सब कुछ एक शुद्ध हादसे से शुरू हुआ।

उस रविवार की दोपहर घर बिल्कुल खाली था। मामा १० दिन के ट्रिप पर निकल चुके थे। रोहन कॉलेज से जल्दी आ गया क्योंकि लास्ट लेक्चर कैंसल हो गया था। मुख्य दरवाजा चुपके से खोला, सोच रहा था मामी आराम कर रही होंगी।

बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था।
उसे एक हल्की, अजीब सी आवाज सुनाई दी – जैसे कोई साँस रोकने की कोशिश कर रहा हो और फेल हो रहा हो। जिज्ञासा ने उसे और पास खींच लिया। गैप से उसने देखा।

प्रिया मामी बिस्तर पर सिर्फ एक पतली सफेद कॉटन की पेटीकोट और ब्लाउज में लेटी हुई थीं। पेटीकोट कमर तक चढ़ी हुई। टाँगें फैली हुईं। एक हाथ मुँह पर दबा रखा था, दूसरा जाँघों के बीच, उँगलियाँ धीरे-धीरे, शर्म से हिल रही थीं। आँखें बंद थीं। कमरे में गीली-गीली आवाजें गूँज रही थीं।

रोहन पत्थर बन गया। दिल जोरों से धड़कने लगा। पूरा एक मिनट वह बस देखता रहा। उनकी भारी चूचियों का ब्लाउज के नीचे उठना-गिरना, उँगलियों पर चमकती गीली चमक, मोटी जाँघों का हल्का काँपना… उसके अंदर कुछ काला और भूखा जाग उठा।

उसने फोन निकाला और रिकॉर्ड दबा दिया।

जब वह एक दबी हुई चीख के साथ खत्म हुई और आँखें खोलीं, रोहन पहले से दरवाजे में खड़ा था, फोन अभी भी उठाए हुए।

प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया। वह जल्दी से पेटीकोट नीचे खींचने लगी, आवाज काँप रही थी।

“रोहन… बेटा… तू… तू यहाँ क्या कर रहा है? दरवाजा बंद कर… जा यहाँ से…”

उसने बजाय इसके दरवाजा लॉक कर दिया।

“मैंने सब रिकॉर्ड कर लिया है, मामी।” उसकी आवाज शांत, लगभग नरम थी। “पाँच मिनट। साफ वीडियो। तेरा चेहरा, तेरा हाथ, सब कुछ।”

वह उसे घूरती रही, साँसें तेज चल रही थीं। “डिलीट कर दे। प्लीज। मैं तेरी मामी हूँ… ये गलत है…”

रोहन बिस्तर के किनारे बैठ गया। “मैं डिलीट कर दूँगा। लेकिन सिर्फ तभी जब आज से तू वही करेगी जो मैं कहूँगा। कोई बहस नहीं। किसी को बताना नहीं। मामा या किसी को एक शब्द भी कहा तो ये वीडियो हर रिश्तेदार, हर व्हाट्सएप ग्रुप, हर पड़ोसी को चला जाएगा।”

उसकी आँखों में आँसू भर आए। “रोहन… बेटा… मत कर ये…

वह और पास झुक गया। “तू वो औरत है जिसे मैंने दोपहर को खुद को उँगली करते देखा। और अब से तू मेरी है, जब भी मुझे चाहिए।”

उस रात ब्लैकमेल सच में शुरू हुआ।

उसने उसे सिर्फ पेटीकोट में बिस्तर पर बैठाया। ब्लाउज नहीं। उसकी भारी चूचियाँ खुली लटक रही थीं, निप्पल डर और शर्म से पहले से कड़े हो चुके थे। उसने हुक्म दिया कि आईने के सामने खड़ी हो और धीरे-धीरे पेटीकोट खोले। जब कपड़ा गिरा, वह पूरी नंगी खड़ी थी – नरम पेट, बालों का काला त्रिकोण, मोटी जाँघें एक-दूसरे से सटी हुईं।

“मुड़ जा। थोड़ा झुक।”

उसने आज्ञा मानी, चेहरा जल रहा था। रोहन ने हाथ उसके नरम गाँड पर फेरा, जोर से मसला, फिर एक थप्पड़ मारा। आवाज शांत कमरे में गूँजी। वह चौंक गई, एक छोटी सी चीख निकल गई।

“ये तो सिर्फ शुरुआत है, मामी।”

उसके बाद हर दिन नियम और सख्त होते गए।

सुबह: उसे मुँह से जगाना पड़ता था। वह बिस्तर पर लेटा रहता, पहले से सख्त, और उसे गहरा लेना पड़ता, धीरे-धीरे गैग करते हुए, आँखों में आँसू लिए जब वह बाल पकड़कर रखता। उसे पसंद था कि उसका गला उसके लंड के चारों ओर कस जाता। कभी-कभी वह और गहरा धकेलता जब तक वह दम न घुट जाए, थूक ठोड़ी से बहकर उसकी भारी चूचियों पर गिरे।

दोपहर: जब घर खाली होता, वह उसे नंगा घुमाता। खाना बनाते, झाड़ू लगाते, दरवाजा सिर्फ एक पतला तौलिया डालकर खोलना पड़ता जो मुश्किल से कुछ ढकता। एक बार दूधवाला आया और उसे सिर्फ तौलिया में दरवाजा खोलना पड़ा। रोहन दरवाजे के पीछे खड़ा था, फोन तैयार, उसके काँपते हुए शरीर को देख रहा था।

रात सबसे बुरी होती।

वह धीमी यातना से शुरू करता। उसे पीठ के बल लिटाता, टाँगें तकिए के सहारे चौड़ी फैलाकर। फिर नरम अंदरूनी जाँघों पर थप्पड़ मारता जब तक वे लाल न हो जाएँ, मोटे निप्पल पिंच करता जब तक वह रो न पड़े, और अपने लंड का सिर उसकी गीली छेद पर रगड़ता बिना घुसाए – सिर्फ छेड़ता, जब तक वह टपकने न लगे और तड़पकर रुकने की भीख न माँगे।

लेकिन वह जल्दी नहीं रुकता था।

पहली बार उसने उसे तीसरी रात चोदा।

उसे डाइनिंग टेबल पर झुका दिया, चेहरा ठंडी लकड़ी पर दबाया। एक हाथ उसकी बाँह पीठ के पीछे मरोड़ रखा। दूसरे से अपना मोटा लंड उसके नरम, गीले फोल्ड्स के बीच गाइड किया। जोर से धकेल दिया – एक लंबा, गहरा धक्का जिसने उसे टेबल में चीखने पर मजबूर कर दिया।

“आह्ह्ह… रोहन… दर्द हो रहा है… बहुत मोटा है…”

“अच्छा है।” वह लगभग पूरा निकालकर फिर जोर से धंस गया। टेबल हिल गई। उसकी भारी चूचियाँ हर धक्के के साथ झूल रही थीं। वह उसे सख्त और गहरा चोदता रहा, त्वचा की गीली थप-थप की आवाज घर में गूँज रही थी। जब उसने टाँगें बंद करने की कोशिश की, उसने उसकी गाँड पर इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि निशान घंटों लाल रहा।

उस रात वह उसके अंदर गहरा उतरकर झड़ गया, कूल्हे कसकर पकड़े, हर बूँद उसके अंदर पंप करते हुए गुर्राता रहा।

उसके बाद दर्द उसकी मस्ती का हिस्सा बन गया।

वह उसे और रफ इस्तेमाल करने लगा। कभी उसकी कलाईयाँ हेडबोर्ड से उसकी ही दुपट्टे से बाँध देता और लगभग एक घंटे तक एज करता – जीभ, उँगलियाँ, लंड – आने नहीं देता जब तक वह सिसकती और काँपती न रह जाए। फिर पीछे से सख्त चोदता बाल खींचते हुए।

वह उसके बाल जोर से खींचता, सिर पीछे झुकाते हुए जब उसका मोटा लंड पीछे से गहरा धंसता। हर धक्के से उसकी भारी चूचियाँ झूलकर नरम पेट से टकरातीं। त्वचा की गीली थप-थप बेडरूम में गूँजती। प्रिया की दबी चीखें बिस्तर की चर्र-चर्र के साथ मिल जातीं।

“मामी… बोल… किसकी है ये चूत?” रोहन उसके कान में गुर्राया, एक हाथ अभी भी बाँह पीठ के पीछे मरोड़े हुए।

“त-तेरी… बेटा… तेरी है…” वह सिसकते हुए बोली, गालों पर आँसू बह रहे थे जबकि उसकी चूत उसके चारों ओर कस रही थी।

वह अंधेरे में हँसा और फिर से गाँड पर जोरदार थप्पड़ मारा। तीखी जलन से वह उछली और और कस गई। उसे ये पसंद था। वह पूरा निकाल लिया, उसे खाली और टपकता छोड़कर, फिर पीठ के बल पलट दिया। टाँगें जबरन चौड़ी कीं। दोनों घुटने छाती की तरफ धकेल दिए, लगभग आधा मोड़कर, और एक क्रूर धक्के में फिर अंदर घुस गया।

“आह्ह्ह… धीरे… प्लीज…” उसने भीख माँगी, लेकिन आवाज कमजोर थी।

रोहन ने अनसुना किया। वह गहरा और तेज चोदता रहा, लंड का सिर हर स्ट्रोक पर उसकी गर्भाशय से टकराता। दर्द और जबरन मजा मिलकर उसकी आँखें पीछे लुढ़क गईं। नरम पेट हर टक्कर से हिलता। वह झुककर एक मोटे निप्पल को इतनी जोर से काटा कि निशान पड़ गए, चूसते और खींचते हुए जबकि कूल्हे कभी नहीं रुके।

जब आखिरकार झड़ा, उसने जितना गहरा हो सकता था धकेला और बाढ़ ला दी। गरम वीर्य मोटे छींटों में उसके गर्भ में पंप होता रहा। वह अंदर ही दबा रहा, धीरे-धीरे रगड़ता, हर बूँद अंदर ही रहे ये पक्का करते हुए। तभी निकाला, अपनी वीर्य को उसकी लाल, सूजी चूत से रिसते देखा।

ये नई नॉर्मल बन गई।

दिन ब्लैकमेल और रफ इस्तेमाल की दिनचर्या में बदल गए।

सुबह वह उसे बाथरूम के फर्श पर घुटनों के बल बैठाता जब वह नहाता। कभी-कभी सुबह का पेशाब मुँह में लेना पड़ता, फिर जीभ से साफ करना जब तक वह फिर सख्त न हो जाए। वह दीवार के खिलाफ उसका मुँह चोदता, दोनों मुट्ठियों में बाल पकड़े, उसके गले को खिलौने की तरह इस्तेमाल करता जब तक थूक और आँसू नंगे शरीर से बहकर भारी चूचियों पर न गिरें।

दोपहर छेड़छाड़ और पब्लिक रिस्क के लिए होती। एक बार उसने सिर्फ पतली नाइटी बिना पैंटी के पहनाई जब पड़ोसन आंटी चाय पीने आईं। बात करते हुए रोहन का हाथ टेबल के नीचे था, दो उँगलियाँ उसकी गीली चूत में गहरी धँसी, धीरे-धीरे पंप कर रहा था। प्रिया को मुस्कुराते हुए बिस्किट परोसना पड़ता जबकि जाँघें काँप रही थीं और वह कराहने से बचने की कोशिश कर रही थी। पड़ोसन के जाने के बाद उसने उसे सोफे पर झुकाकर पीछे से सख्त चोदा, एक हाथ मुँह पर दबाए ताकि पड़ोसी उसकी चीखें न सुनें।

रातें सबसे लंबी होतीं।

वह और दर्द इस्तेमाल करने लगा। कलाईयाँ और टखने बिस्तर के चारों कोनों से नरम कपड़े से बाँध देता ताकि टाँगें बंद न कर सके। फिर मोमबत्ती से गरम मोम नरम पेट, निप्पल और अंदरूनी जाँघों की संवेदनशील त्वचा पर टपकाता। हर बूँद से वह झटकती और रोती। जब त्वचा ठंडी मोम से ढक जाती, वह धीरे-धीरे उतारता, फिर लाल निशानों पर थप्पड़ मारता। उसके बाद ही अपना लंड उसकी टपकती छेद में धकेलकर बेदर्दी से चोदता।

एक रात उसने स्टडी टेबल से छोटी लकड़ी की रूलर लाई। उसे बिस्तर के किनारे झुकाया, गाँड ऊँची। पहले धीरे-धीरे पिटाई की, हर स्ट्रोक गिनते हुए। बीसवें तक उसकी नरम गाँड चमकदार लाल और जल रही थी। आँसू चादर भिगो चुके थे। फिर पीछे से घुस गया जब त्वचा अभी भी जल रही थी, घर्षण से हर धक्का और तेज हो गया। फिर गहरा झड़ गया, बाल इतने जोर से खींचे कि कमर मुड़ गई।

कभी वह उसे ऊपर बैठाकर चोदता। वह लेट जाता और उसे अपने लंड पर बिठाता, फिर कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से उछालता। उसकी भारी चूचियाँ हर मूवमेंट से छाती से टकरातीं। जब थकान से धीमी पड़ती तो जाँघों पर थप्पड़ मारकर और तेज जाने का हुक्म देता। उसे उसका चेहरा देखना पसंद था – शर्म, दर्द और अनचाही मजे का मिक्स जब उसकी चूत कसती और उसके पेट पर टपकती।

ब्लैकमेल कभी ढीला नहीं पड़ा।

एक शाम मामा ने वीडियो कॉल किया। रोहन ने प्रिया को नंगी गोद में बैठाया जबकि वह बात कर रही थी, उसका मोटा लंड पीछे से धीरे-धीरे अंदर-बाहर सरक रहा था। उसे आवाज नॉर्मल रखनी पड़ी, फोन पर मुस्कुराते हुए जबकि भतीजा चुपचाप उसे चोद रहा था। कॉल खत्म होते ही वह फूट-फूट कर रो पड़ी, लेकिन रोहन ने सिर्फ उसका चेहरा तकिए में दबाया और और जोर से जारी रखा।

दूसरे हफ्ते के अंत तक वह लड़ना बंद कर चुकी थी। उसका शरीर जवाब देने लगा था भले दिमाग नफरत करता हो। निप्पल कड़े रहने लगे। चूत गीली रहने लगी जैसे ही वह उसे किसी खास नजर से देखता। उसने नोटिस किया। उसने इस्तेमाल किया।

एक देर रात उसने उसे फुल-लेंथ आईने के सामने पूरी नंगी खड़ा किया, टाँगें फैली हुईं। वह पीछे खड़ा था, एक हाथ गले पर, दूसरा सूजे क्लिट को रगड़ते हुए उसी हाथ की दो उँगलियाँ अंदर धकेल रहा था। उसने खुद को देखने पर मजबूर किया।

“देख मामी… देख कैसे गीली हो रही है। बॉडी तो मान गई ना?”

उसने कमजोर सिर हिलाया, आँखें धुँधली, जब एक और ऑर्गाज्म ने उसे चीर दिया। घुटने ढह गए। उसने गले से पकड़कर संभाला और उँगलियाँ चलाता रहा जब तक वह काँपती और सिसकती न रह जाए।

फिर उसे आगे झुकाया, हाथ आईने पर, और उस रात आखिरी बार घुस गया – पहले धीरे, फिर गहरे, सजा देने वाले धक्कों में जो आईना हिला रहे थे। फिर भर दिया, निकाला तभी जब आखिरी बूँद निकल चुकी। वीर्य उसकी अंदरूनी जाँघों पर मोटी सफेद लकीरों में बहने लगा।

उसने उँगलियों से थोड़ा सा पोंछा और उसके मुँह में ठूँस दिया।

“निगल। कल सुबह मुझे वैसे ही जगाना। मुँह खुला। तैयार।”

प्रिया ने अपने रिफ्लेक्शन को देखा – बिखरे बाल, चूचियों और गाँड पर लाल निशान, इस्तेमाल हुई चूत से अभी भी वीर्य रिस रहा – और बची हुई एकमात्र शब्द फुसफुसाई।

“हाँ… बेटा।”

रोहन मुस्कुराया, उसकी गर्दन के साइड पर नरम सा चुंबन लिया, लगभग धीरे से, और फुसफुसाया,

“गुड गर्ल, मामी। अब तू मेरी है।”

ब्लैकमेल जारी रहा। रातें और लंबी होती गईं। और वो मासूम मामी जिसने कभी अपनी इच्छाएँ छुपाई थीं, अब हर दिन और हर रात अपने भानजे के कंट्रोल में जीने लगी – नंगी, इस्तेमाल की हुई, निशान भरी, और पूरी तरह उसकी हो चुकी।

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